अब आज़म और मेनका गांधी की भी चुनाव आयोग ने की 'बोलती बंद'

चुनाव आयोग ने सपा नेता आज़म ख़ान और बीजेपी नेता मेनका गांधी पर आचार संहिता उल्लंघन के मामले में कार्रवाई करते हुए प्रचार करने पर कुछ वक़्त की रोक लगा दी है.

इससे पहले चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता योगी आदित्यनाथ और बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती पर भी ऐसी कार्रवाई कर चुका है.

आज़म ख़ान पर बीजेपी नेता जया प्रदा को लेकर की गई टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने उन्हें 72 घंटे तक प्रचार करने से रोक दिया है.

आज़म ख़ान ने कहा क्या?

रामपुर में एक चुनावी सभा के दौरान आज़म ख़ान ने कथित तौर पर जया प्रदा के बारे में एक टिप्पणी की. ख़ान ने कहा "रामपुरवासियों को जिन्हें समझने में 17 साल लगे, उन्हें मैंने 17 दिन में ही पहचान लिया था कि उनकी अंडरवियर का रंग ख़ाकी है."

उनके इस बयान का काफी विरोध हुआ. राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख रेखा शर्मा ने आज़म ख़ान को नोटिस जारी करते हुए इस मामले पर स्पष्टीकरण भी मांगा. इसके साथ ही उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की जा चुकी है.

बाद में जब जया प्रदा से इस संबंध में प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा "आज़म ख़ान की उम्मीदवारी रद्द होनी चाहिए क्योंकि अगर वह चुनाव जीत जाते हैं तो इससे समाज में महिलाओं की स्थिति ख़राब होगी."

मेनका गांधी ने ऐसा क्या कहा जो बोलती बंद करनी पड़ी

मेनका गांधी को सुल्तानपुर में मुसलमानों से वोट न देने पर काम न करने की बात पर चुनाव आयोग ने 48 घंटे तक प्रचार नहीं करने की पाबंदी लगाई है.

मेनका के इस बयान का एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें वो कह रही हैं, ''मैं जीत रही हूं. लोगों की मदद और प्यार से मैं जीत रही हूं. लेकिन अगर मेरी जीत मुसलमानों के बिना होगी, तो मुझे बहुत अच्छा नहीं लगेगा. क्योंकि इतना मैं बता देती हूं कि दिल खट्टा हो जाता है. फिर जब मुसलमान आता है काम के लिए तो मैं सोचती हूं कि रहने दो, क्या फ़र्क पड़ता है."

हालांकि बाद में मेनका गांधी ने अपने इस बयान पर सफ़ाई भी दी. उन्होंने कहा कि कि उनके बयान को काट-छांट कर पेश किया गया है.

मेनका गांधी: मुसलमानों पर दिए बयान पर मिला नोटिस, दी सफ़ाई

इससे पहले आयोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीन दिन और मायावती पर दो दिनों तक प्रचार करने से रोक चुका है. यह पाबंदी 16 अप्रैल को सुबह छह बजे से लागू हो जाएगी.

योगी आदित्यनाथ ने मेरठ की रैली में 'अली' और 'बजरंगबली' की टिप्पणी की थी. चुनाव आयोग ने योगी के इस बयान को आपत्तिजनक पाया और तीन दिन के लिए चुनाव अभियान पर पाबंदी लगा दी.

योगी ने नौ अप्रैल को मेरठ में कहा था, ''अगर कांग्रेस, सपा और बसपा को भरोसा 'अली' में है तो हमलोगों की आस्था बजरंगबली में है.''

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा था कि वो कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद ही चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई की है.

मायावती का इनकार, इनकार के बहाने प्रचार

बसपा अध्यक्ष मायावती ने अपने बयान पर सफ़ाई भी दी है. उन्होंने प्रेस कांफ्रेस में कहा, "मैंने आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं किया है. मैंने अलग-अलग धर्मों के लोगों से वोट बांटने की अपील नहीं की थी. मैंने एक ही धर्म के मुस्लिम समाज के दो उम्मीदवारों में से एक उम्मीदवार के पक्ष में वोट करें."

"ये दो धर्मों के बीच नफरत फैलाने की बात में कतई नहीं आता है. अगर दो धर्म के उम्मीदवार होते तो ये बात समझ में आती है. लेकिन ऐसा नहीं था."

मायावती ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में मोदी पर आरोप लगाया कि वे लगातार सेना का नाम ले रहे हैं, जिस पर चुनाव आयोग की नजर नहीं जाती है. मायावती ने कहा, "चुनाव आयोग ने मुझ पर पाबंदी लगा दी है, योगी पर भी लगाई है लेकिन मोदी जी को क्यों नोटिस नहीं मिलता."

मायावती ने ये भी कहा कि पाबंदी कल की है तो वह आगरा की रैली में हिस्सा नहीं ले पाएंगी. लेकिन रैली होगी, जिसमें अखिलेश यादव और चौधरी अजित सिंह हिस्सा लेंगे.

मायावती ने कहा कि प्रेस कांफ्रेंस के जरिए वे आगरा और फतेहपुर सीकरी में महागठबंधन के उम्मीदवार को जिताने की अपील कर रही हैं.

मायावती और योगी के बयानों को चुनाव आयोग ने आपत्तिजनक पाया है.

मायावती ने 7 अप्रैल को सहारनपुर में अपने भाषण में मुसलमानों से अपील करते हुए कहा था कि वो अपना वोट नहीं बँटने दें. सहारानपुर से हाजी फ़ैजल-उर-रहमान बीएसपी और गठबंधन साथियों के उम्मीदवार हैं. चुनाव आयोग ने मायावती के भाषण का वीडियो देखने के बाद पाया कि आपत्तिजनक था.

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