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Showing posts from December, 2018

कुछ चीज़ें हम क्यों भूल जाते हैं, जबकि कुछ हमेशा याद रहती हैं

ज़िंदगी के शुरुआती दिनों की यादें सहेजना ना मुमकिन है...मगर कुछ लोग हैं कि मानते नहीं. महाभारत के किरदार अभिमन्यु ने मां के गर्भ में रहते हुए ही जाना था कि चक्रव्यूह को भेद कर उसके अंदर कैसे जाते हैं. जब अभिमन्यु की मां गर्भवती थीं, तो धनुर्धर अर्जुन ने ये क़िस्सा उन्हें सुनाया था. महाभारत के अनुसार, अभिमन्यु ने ये तो जान लिया था कि चक्रव्यूह के भीतर कैसे जाते हैं. पर, वो अपने पिता से ये नहीं सीख पाये थे कि च क्रव्यूह से बाहर कैसे आते हैं. क्योंकि अभिमन्यु की मां उस वक़्त सो गई थीं, जब अर्जुन उन्हें ये नुस्ख़ा बता रहे थे. महाभारत के इस क़िस्से से ऐसा लगता है कि मां के गर्भ में पल रहे बच्चे की भी याददाश्त होती है. निश कलाकार साल्वाडोर डैली ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, ''मैं ये मान कर चलता हूं कि मेरे लेखकों को अपने बचपन की बातें या तो बिल्कुल ही याद नहीं, या फिर उस दौर की उनकी यादें बहुत धुंधली हैं. मगर, ज़िंदगी के उस बेहद अहम दौर और जन्म से भी पहले मां के गर्भ के तजुर्बे की एक-एक बात मुझे याद है. मुझे लगता है जैसे ये अभी कल की ही बात हो.'' डैली को उम्मीद थी कि ...

फ़िल्मी दुनिया का वो डायनासोर जो कभी पर्दे पर नहीं आ सका

1993 में पहली "जुरासिक पार्क" फ़िल्म बनी. इसमें कुछ लोग एक द्वीप की यात्रा पर जाते हैं और वहां डायनासोर देखते हैं. ये डायनासोर उन्हें चट कर जाने की योजना बनाते हैं. फ़िल्म के सीन इतने पुराने फिल्माए गए थे मानो वे इतिहास से भी पहले के वक्त के हों. 1997 में इस फ़िल्म का पहला सीक्वल बना. उसी समय से यह बात होने लगी थी कि फ़िल्म एक तय फॉर्मूले पर बन रही है. "द लॉस्ट वर्ल्डः जुरासिक पार्क" में डॉ . इयान मैल्कम की भूमिका निभा रहे जेफ़ गोल्डब्लम कहते हैं, "यह हमेशा इसी तरह शुरू होता है. बाद में वहां दौड़ना-भागना है और चीखना-चिल्लाना है." यह समझ होने के बावजूद "जुरासिक पार्क-3" (2001) और "जुरासिक वर्ल्ड" (2015) के निर्माता इसी फॉर्मूले से चिपके रहे. लेकिन इस साल आई फ़िल्म "जुरासिक वर्ल्डः फ़ॉलेन किंगडम" में आख़िरकार उस फॉर्मूले को छोड़ दिया गया. 2004 में "पैशन फिश" और "लोन स्टार" के लेखक-निर्देशक जॉन सेलेस ने "जुरासिक पार्क 4" के लिए पटकथा लिखी थी. सेलेस की स्क्रिप्ट में कई क्रांतिकारी विचार थे...

मां बनते ही यहाँ होटल में क्यों भेज दी जाती हैं महिलाएं

डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन. यहां के बेबी होटल की गलियारों से गुज़रते वक़्त बच्चों की किलकारियां और रोने की आवाज़ें सुनाई देती रहती हैं. उन गलियारों में बच्चों की देखभाल करने वाली नर्सेज़ दिखती हैं तो यह समझना मुश्किल होता है कि यह मैटर्निटी वार्ड है या बेबी होटल. हेड नर्स टीना होम निल्सन इस पहेली को सुलझा देती हैं. वो बताती हैं, "वे सभी महिलाएं जिन्होंने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया है, वे दो दिनों के लिए यहां रुक सकती हैं." "यदि मां या बच्चे को कोई समस्या है तो वे यहां तब तक रुक सकते हैं जब तक कि उन्हें हमारी सहायता की ज़रूरत है." डेनमार्क का यह मैटर्निटी होटल प्रोग्राम सरकारी फंड से चलता है. यह सभी बच्चों को उनकी ज़िंदगी के पहले दिन बराबरी का अधिकार और समान देखभाल का अवसर देता है. बच्चे के माता-पिता चाहे किसी किसी भी सामाजिक या आर्थिक वर्ग के हों, वे अमीर हों या गरीब , उनको यहां बराबरी का अधिकार मिलता है. होटल जैसा अस्पताल यह पब्लिक प्रोग्राम कोपेनहेगन के ह्विदोव्रे अस्पताल में चलता है और यह डेनमार्क के उदार चाइल्डकेयर नीतियों का हिस्सा है. ...

Xiaomi स्मार्टफोन्स, इयरफोन्स, बैंड, राउटर्स मिल रहे हैं काफी सस्ते

Xiaomi के स्मार्टफोन्स भारत में काफी पॉपुलर हैं. इन्हें सस्ते में खरीदना है तो आपके पास ये नया ऑप्शन है. ई-कॉमर्स वेबसाइट ऐमेजॉन पर शाओमी के रीफर्बिश्ड प्रोडक्ट खरीद सकते हैं. रीफर्बिश्ड यानी पुराने स्मार्टफोन को नया जैसा बना कर देना. ऐमेजॉन के मुताबिक ये प्रोडक्ट्स नए जैसे ही हैं. शाओमी के ये प्रोडक्ट्स सर्टिफाइड हैं और ये लिमिटेड पीरियड प्रोमोशनल सेल का हिस्सा हैं. इस दौरान आपको Mi A1, Redmi 6 Pro सहित कुछ दूसरे स्मार्टफोन्स सस्ते में मिल सकते हैं. Redmi 6 Pro 3GB रैम और 32GB वेरिएंट को आप 9,899 रुपये में खरीद सकते हैं, जबकि इसके 4GB रैम वेरिएंट को 11,699 रुपये में खरीद सकते हैं. ऐमेजॉन पर आपको 10,400 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी दिया जा रहा है. Redmi Y2 और Redmi 5 के रीफर्बिश्ड वर्जन की बात करें तो Y2 के 4GB वेरिएंट को 10,499 रुपये में ही ले सकते हैं. जबकि Redmi 5 का रीफर्बिश्ड वर्जन 7899 रुपये में मिल रहा है. स्टॉक एंड्रॉयड यूज करना चाहते हैं तो Mi A1 और Mi A2 अच्छे ऑप्शन हैं. Mi A1 का रीफर्बिश्ड वर्जन यहां 9,749 रुपये में मिल रहा है, जबकि Mi A2 को आप सिर्फ 13,949 रुपये म...

मोदी के सबसे भरोसेमंद जगदीश ठक्कर का निधन

प्रधानमंत्री दफ़्तर यानी पीएमओ के सबसे भरोसेमंद जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) जगदीश ठक्कर का 72 साल की उम्र में निधन हो गया है. ठक्कर लंबे समय से कैंसर से ज़िंदगी की जंग लड़ रहे थे. सितंबर महीने से उनका इलाज दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में चल रहा था. प्रधानमंत्री मोदी ने ठक्कर के निधन पर ट्वीट कर शोक जताया है. मोदी और ठक्कर का लंबा साथ ठक्कर लंबे वक़्त से नरेंद्र मोदी के साथ काम कर रहे थे. जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब वे गुजरात के मुख्यमंत्री दफ़्तर में थे और बाद में साल 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर वो पीएमओ चले आए. लगभग तीन दशक तक ठक्कर ने गुजरात के क़रीब 10 मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया. पीएम मोदी ने ठक्कर को याद करते हुए एक और ट्वीट किया है. मोदी ने ट्वीट में लिखा है, ''पिछले कई सालों से बहुत से पत्रकार जगदीश भाई के संपर्क में आए होंगे. उन्होंने गुजरात के बहुत से मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया. हमने एक बेहतरीन इंसान को खो दिया, जो अपने काम से प्यार करते थे और उसे पूरी लगन से करते थे. उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं.'' 10 ...