कुछ चीज़ें हम क्यों भूल जाते हैं, जबकि कुछ हमेशा याद रहती हैं
ज़िंदगी के शुरुआती दिनों की यादें सहेजना नामुमकिन है...मगर कुछ लोग हैं कि मानते नहीं.
महाभारत के किरदार अभिमन्यु ने मां के गर्भ में रहते हुए ही जाना था कि चक्रव्यूह को भेद कर उसके अंदर कैसे जाते हैं. जब अभिमन्यु की मां गर्भवती थीं, तो धनुर्धर अर्जुन ने ये क़िस्सा उन्हें सुनाया था.
महाभारत के अनुसार, अभिमन्यु ने ये तो जान लिया था कि चक्रव्यूह के भीतर कैसे जाते हैं. पर, वो अपने पिता से ये नहीं सीख पाये थे कि चक्रव्यूह से बाहर कैसे आते हैं. क्योंकि अभिमन्यु की मां उस वक़्त सो गई थीं, जब अर्जुन उन्हें ये नुस्ख़ा बता रहे थे.
महाभारत के इस क़िस्से से ऐसा लगता है कि मां के गर्भ में पल रहे बच्चे की भी याददाश्त होती है.
निश कलाकार साल्वाडोर डैली ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, ''मैं ये मान कर चलता हूं कि मेरे लेखकों को अपने बचपन की बातें या तो बिल्कुल ही याद नहीं, या फिर उस दौर की उनकी यादें बहुत धुंधली हैं. मगर, ज़िंदगी के उस बेहद अहम दौर और जन्म से भी पहले मां के गर्भ के तजुर्बे की एक-एक बात मुझे याद है. मुझे लगता है जैसे ये अभी कल की ही बात हो.'' डैली को उम्मीद थी कि उनके अपने तजुर्बे से प्रेरित होकर लोग अपने बचपन के अनुभवों की यादें ताज़ा कर सकेंगे.
लेकिन, हक़ीक़त ये है कि जन्म के बाद के कुछ साल की यादें सहेजना नामुमकिन है. और जन्म से पहले की बातें याद रख पाना तो बिल्कुल ही संभव नहीं. वजह ये है कि हमारे ज़हन के जिस हिस्से में यादें सहेजी जाती हैं, वो मां के गर्भ के भीतर विकसित नहीं होता. बच्चे के जन्म के बाद भी दिमाग़ के इस हिस्से के विकास में वक़्त लगता है. इसीलिए हम सब को बचपन के पहले कुछ वर्षों की बाते याद नहीं रहतीं हैं.
जो लोग बचपन के क़िस्से विस्तार से बताते हैं, वो असल में ख़याली पुलाव पकाकर परोस रहे होते हैं. वो ये ख़याली पुलाव असल में लोगों की सुनी हुई बातों और ज़िंदगी के दूसरे तजुर्बों की के आधार पर पका कर परोसते हैं.
आप की याददाश्त मौसम यानी तापमान पर निर्भर करती है.
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि इंसान की याददाश्त किसी संदर्भ से जुड़ी बातों को ज़्यादा आसानी से याद रखती है.
इसे समझने के लिए एक तजुर्बा कीजिए. कुछ लोगों को बेहद ठंडे पानी में हाथ डालने को कहिए. फिर उन्हें कुछ शब्द बताकर उन्हें याद करने को कहिए.
ऐसा तजुर्बा करने वाले रिसर्चरों ने पाया है कि इस प्रयोग में भाग लेने वालों की याददाश्त उस वक़्त ताज़ा हो गई, जब उन्होंने बाद में फिर से ठंडे पानी से भरी बाल्टी में हाथ डाला.
यानी हम किसी ख़ास अनुभव के दौरान याद किए गए सबक़ ज़्यादा दिन तक सहेज कर रख पाते हैं.
यही वजह है कि शराब पीकर टल्ली हुए लोगों को कई बार उस रात की बातें याद रह जाती हैं. हालांकि, अक्सर ऐसे लोग उन बातों को ठीक-ठीक दोहरा नहीं पाते.
पढ़ाई के दौरान जो लोग कॉफ़ी पीते हैं या च्यूंइंग गम चबाते रहते हैं, उन्हें सबक़ ज़्यादा बेहतर ढंग से याद रह जाते हैं. इसी तरह कोई ख़ुशबू भी याददाश्त से जुड़कर उन्हें ताज़ा रखती है. इम्तिहान के दौरान कोई ख़ास परफ्यूम या आफ़्टरशेव इस्तेमाल करना काम का नुस्ख़ा हो सकता है.
महाभारत के किरदार अभिमन्यु ने मां के गर्भ में रहते हुए ही जाना था कि चक्रव्यूह को भेद कर उसके अंदर कैसे जाते हैं. जब अभिमन्यु की मां गर्भवती थीं, तो धनुर्धर अर्जुन ने ये क़िस्सा उन्हें सुनाया था.
महाभारत के अनुसार, अभिमन्यु ने ये तो जान लिया था कि चक्रव्यूह के भीतर कैसे जाते हैं. पर, वो अपने पिता से ये नहीं सीख पाये थे कि चक्रव्यूह से बाहर कैसे आते हैं. क्योंकि अभिमन्यु की मां उस वक़्त सो गई थीं, जब अर्जुन उन्हें ये नुस्ख़ा बता रहे थे.
महाभारत के इस क़िस्से से ऐसा लगता है कि मां के गर्भ में पल रहे बच्चे की भी याददाश्त होती है.
निश कलाकार साल्वाडोर डैली ने अपनी आत्मकथा में लिखा है, ''मैं ये मान कर चलता हूं कि मेरे लेखकों को अपने बचपन की बातें या तो बिल्कुल ही याद नहीं, या फिर उस दौर की उनकी यादें बहुत धुंधली हैं. मगर, ज़िंदगी के उस बेहद अहम दौर और जन्म से भी पहले मां के गर्भ के तजुर्बे की एक-एक बात मुझे याद है. मुझे लगता है जैसे ये अभी कल की ही बात हो.'' डैली को उम्मीद थी कि उनके अपने तजुर्बे से प्रेरित होकर लोग अपने बचपन के अनुभवों की यादें ताज़ा कर सकेंगे.
लेकिन, हक़ीक़त ये है कि जन्म के बाद के कुछ साल की यादें सहेजना नामुमकिन है. और जन्म से पहले की बातें याद रख पाना तो बिल्कुल ही संभव नहीं. वजह ये है कि हमारे ज़हन के जिस हिस्से में यादें सहेजी जाती हैं, वो मां के गर्भ के भीतर विकसित नहीं होता. बच्चे के जन्म के बाद भी दिमाग़ के इस हिस्से के विकास में वक़्त लगता है. इसीलिए हम सब को बचपन के पहले कुछ वर्षों की बाते याद नहीं रहतीं हैं.
जो लोग बचपन के क़िस्से विस्तार से बताते हैं, वो असल में ख़याली पुलाव पकाकर परोस रहे होते हैं. वो ये ख़याली पुलाव असल में लोगों की सुनी हुई बातों और ज़िंदगी के दूसरे तजुर्बों की के आधार पर पका कर परोसते हैं.
आप की याददाश्त मौसम यानी तापमान पर निर्भर करती है.
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि इंसान की याददाश्त किसी संदर्भ से जुड़ी बातों को ज़्यादा आसानी से याद रखती है.
इसे समझने के लिए एक तजुर्बा कीजिए. कुछ लोगों को बेहद ठंडे पानी में हाथ डालने को कहिए. फिर उन्हें कुछ शब्द बताकर उन्हें याद करने को कहिए.
ऐसा तजुर्बा करने वाले रिसर्चरों ने पाया है कि इस प्रयोग में भाग लेने वालों की याददाश्त उस वक़्त ताज़ा हो गई, जब उन्होंने बाद में फिर से ठंडे पानी से भरी बाल्टी में हाथ डाला.
यानी हम किसी ख़ास अनुभव के दौरान याद किए गए सबक़ ज़्यादा दिन तक सहेज कर रख पाते हैं.
यही वजह है कि शराब पीकर टल्ली हुए लोगों को कई बार उस रात की बातें याद रह जाती हैं. हालांकि, अक्सर ऐसे लोग उन बातों को ठीक-ठीक दोहरा नहीं पाते.
पढ़ाई के दौरान जो लोग कॉफ़ी पीते हैं या च्यूंइंग गम चबाते रहते हैं, उन्हें सबक़ ज़्यादा बेहतर ढंग से याद रह जाते हैं. इसी तरह कोई ख़ुशबू भी याददाश्त से जुड़कर उन्हें ताज़ा रखती है. इम्तिहान के दौरान कोई ख़ास परफ्यूम या आफ़्टरशेव इस्तेमाल करना काम का नुस्ख़ा हो सकता है.
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