आख़िर चीन को क्यों चाहिए मज़बूत पाकिस्तान

चीन और पाकिस्तान के बीच बनाए जा रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर के बारे में समझा जा रहा है कि इसके बदले पाकिस्तान चीन के साथ "सैन्य समझौता" कर रहा है.

यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सैन्य सहयोग इस परियोजना का हिस्सा है.

19 दिसबंर 2018 को न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट से यह अटकलें तेज़ हो गई हैं, जिसमें मीडिया हाउस ने पाकिस्तान के चीनी सैन्य उपकरणों के निर्माण का विस्तार करने की गोपनीय योजना की समीक्षा की है.

पाकिस्तान और चीन दोनों ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए कहा है कि चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की दृष्टि से बनाया जा रहा है और इसका कोई सैन्य आयाम नहीं है.

हालांकि कई घटनाक्रमों से संकेत मिलते हैं कि पाकिस्तान में चीन की आर्थिक परियोजना पूरी तरह से सैन्य महत्वकांक्षा से अलग नहीं हो सकती है.

ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान और चीन के रिश्ते रणनीतिक साझेदारी से आगे उस दिशा में बढ़ रहे हैं, जहां बीजिंग पाकिस्तान को अपने ख़ुद के सैन्य प्रयासों से जोड़ना चाहता है.

ये प्रयास चीन की वैश्विक महत्वकांक्षाओं से प्रेरित हैं.

दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग में कई पहलू शामिल हैं. पाकिस्तान की सेना चीन में प्रशिक्षण प्राप्त करती है. संयुक्त सैन्य अभ्यासों के अलावा चरमपंथ विरोधी अभ्यास भी साथ में किए जाते हैं.

इतना ही नहीं चीन पाकिस्तान को परमाणु हथियार, युद्धपोत, विमान और मिसाइल जैसे सैन्य उपकरणों को बनाने में भी मदद करता है.

पाकिस्तान के अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने 18 अक्टूबर 2018 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान चीनी हथियारों का सबसे बड़ा आयातक देश है.

रिपोर्ट में एक अमरीकी वेबसाइट रैंद कॉर्पोरेशन के हवाले से कहा गया है कि साल 2000-14 के बीच चीन की कुल हथियारों की बिक्री का 42 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान ने ख़रीदा है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगुवाई वाले केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष यांग यूग्ज़िया कहते हैं कि चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य संबंध दोनों देशों के बीच संबंधों की "रीढ़" है.

यांग कहते हैं, "दोनों देश की सेनाओं को आगे सभी क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग पर ध्यान देना चाहिए. साथ में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता बढ़ाते रहना चाहिए. दोनों देशों को सामान्य हितों की रक्षा के लिए हाथ मिलाना चाहिए."

पाकिस्तान के उर्दू अख़बार नवा-ए-वक़्त के चार जनवरी के अंक में छपे संपादकीय में पाकिस्तानी नौसेना के लिए एक उन्नत युद्धपोत के निर्माण के लिए बीजिंग की सराहना की गई है. उसमें कहा गया है, "आज नौसेना के बेड़े में आधुनिक युद्धपोत दुश्मनों को सबक सिखाने के लिए अत्यंत ज़रूरी है."

अगर चीन का इकोनॉमिक कॉरिडोर सैन्य आयाम ले रहा है तो यह काफ़ी "तार्किक" होगा क्योंकि दोनों देशों के बीच सैन्य एकीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है और दूसरी तरफ़ इकोनॉमिक कॉरिडोर का आर्थिक पक्ष उतनी ही तेज़ी से प्रगति कर रहा है.

चीन पर विशेषज्ञता रखने वाले मैट श्रेडर ने बीबीसी मॉनिटरिंग से कहा, "सहयोगी देशों के लिए इकोनॉमिक कॉरिडोर का केंद्र अमरीका के बजाय चीन रखा गया है. चीन की सत्तारूढ़ पार्टी दुनिया की सबसे शक्तिशाली इकाई बनना चाहती है और वो आर्थिक ताक़त के साथ-साथ सैन्य ताक़त को भी समझती है."

पाकिस्तान में चीन की सैन्य महत्वाकांक्षा का ज़िक्र करते हुए श्रेडर कहते हैं, "यह वास्तव में आश्चर्य की बात होगी, अगर ऐसा नहीं हो रहा होगा तो."

इसके भी कई सबूत हैं कि हिंद महासागर में चीन की सेना पैर पसारना चाहती है.

दक्षिण एशिया से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ जेफ़ एम स्मिथ ने बीबीसी मॉनिटरिंग से कहा, "चीन के लिए पाकिस्तान एक बेहतर जगह है, जहां वो अपने सैन्य उपकरणों को बेच सकता है. क्योंकि पाकिस्तान चीन के क़रीब है, उसकी सीमा इससे लगती है और दोनों देशों के बीच सैन्य बंदरगाह भी है."

Comments

Popular posts from this blog

कुछ चीज़ें हम क्यों भूल जाते हैं, जबकि कुछ हमेशा याद रहती हैं

肺炎疫情:居家隔离期间遭受孩子暴力对待的父母

ЦБ раскритиковал проект закона о переносе арбитражных